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कोवैक्सीन ट्रायल से युवक की मौत, पत्नी ने कही बात…

भोपाल. कोवैक्सीन का ट्रायल डोज लगवाने के 9 दिनों के अंदर जान गंवाने वाले दीपक मरावी के परिवार ने उनकी मौत पर सवाल उठाए हैं. टीला जमालपुरा स्थित सूबेदार कॉलोनी में मृतक के परिवार से मिलने शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) पहुंचे. मृतक की पत्नी ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी बिना जानकारी के उनके पति को टीका लगाया गया. मरावी की पत्नी ने बताया कि उनके पति को कोई भी बीमारी नहीं थी. टीका लगने से ही उनकी मौत हुई है और उनकी मृत्यु के बाद शासन प्रशासन ने आज तक सुध नहीं ली.

दिग्विजय सिंह ने मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे उनके परिवार की मदद करेंगे. स्व. दीपक मरावी के छोटे बेटे पवन के दिल मे छेद है जिसका वे व्यक्तिगत रूप से इलाज करवाएंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि भारत बॉयोटेक के टीके कॉवेक्सीन के परीक्षण के बाद ही दीपक मरावी की मौत हुई है. उन्होंने कहा कि मैं निंदा करता हूं चिकित्सा शिक्षा मंत्री की, जिन्होंने इस मामले को उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रचना को टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य बताया

आरोप- गरीबों पर ही क्यों हो रहे ट्रायल

पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने सवाल उठाया कि आखिर गरीब लोगों पर ही क्यों टीके के परीक्षण किए जा रहे हैं और फिर परीक्षण के बाद उन पर कोई निगरानी नहीं रखी जा रही? तो फिर परीक्षण क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि वे पीढ़ित परिवार के साथ खड़े हैं और उनकी हरसंभव मदद करेंगे.

यह है पूरा मामला

भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का ट्रायल टीका लगवाने वाले 47 वर्षीय वॉलंटियर दीपक मरावी की 21 दिसंबर को मौत हो गई. मरावी टीला जमालपुरा स्थित सूबेदार कॉलोनी में अपने घर में मृत पाए गए थे. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है.पुलिस ने 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम कराया. इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में शव में जहर मिलने की पुष्टि हुई है. मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद होगी. दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है. गौरतलब है कि भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा बनाई गई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन (कोवैक्सीन) का 7 जनवरी को फाइनल ट्रायल पूरा हुआ है.