मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए जो प्रयास शुरू किए थे, अब उसके परिणाम दिखने लगे हैं। एमएसएमई सेक्टर के मामले में योगी सरकार का पौने चार साल का कार्यकाल सपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल पर भारी पड़ा है। इस अवधि में योगी सरकार ने एमएसएमई को पिछली सरकार से करीब दोगुना से अधिक लोन दिया है।
प्रदेश में संचालित आठ लाख सात हजार 537 एमएसएमई इकाइयां हैं। इनमें 30 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर भी मिले हैं। योगी सरकार में वित्त वर्ष 2017-18 में 46,594 करोड़, 2018-19 में 57,808 करोड़, 2019-20 में 71,080 करोड़ और 2020-21 सितंबर तक 36,972 करोड़ रुपये का लोन इस सेक्टर को दिया है। यानी, कुल 2,12,454 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। जबकि, सपा सरकार में कुल एक लाख छह हजार 68 करोड़ रुपये के लोन दिए गए थे। एमएसएमई के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि सीएम योगी ने प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 21 विभागों की नीतियों में बदलाव करने के साथ कानून व्यवस्था सहित कई अहम पहलुओं पर काम किया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में देश में यूपी दूसरे पायदान पर आ गया है। कोरोना काल में भी सीएम योगी ने चार बार मेगा लोन मेला लगाकर उद्योगों को लोन वितरित किया।