उत्तर प्रदेश: ‘फतेहपुर जिले के बिंदकी में घनवाखेड़ा गांव में कोठरी ढहने से मां-बेटी की मौत हो गई। हादसे में दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हुई हैं। जिन्हें सीएचसी बिंदकी से कानपुर हैलट के लिए रेफर किया गया है।

हादसे की जानकारी होते ही एसडीएम बिंदकी, सीओ समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया। सीएचसी में घायलों का हाल जाना। हादसा बुधवार को लगातार बारिश के कारण हुआ। बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के घनवाखेड़ा निवासी राहुल सोनकर (30) मजदूरी करता है।
उसकी मां गंगाजलि (70) बाहर की ओर बनी कच्ची कोठरी में शाम को लेटी थी। कोठरी की दीवारें नमी के कारण करीब सात बजे धंसकने लगी। इसका अहसास होने पर बुजुर्ग गंगाजलि जोर से चीखी।
बेटा राहुल, उसकी पत्नी सारिका (27), नौ माह की बेटी छोटी को गोद में लेकर गंगाजलि को कोठरी से बाहर निकालने पहुंचे। इसी दौरान बेटी सुहानी (5) और बेटा आयुष (3) भी पीछे से पहुंच गए। राहुल ने मां को बाहर निकाला और चारपाई हटाने लगा, तभी सारिका कोठरी से कुछ सामान बाहर हटाने लगी।
इसी दौरान कोठरी भरभरा कर ढह गई। राहुल और गंगाजलि बाहर आ चुके थे। मलबा गिरने में हल्की चोट आई। राहुल की चीख पुकार पर गांव के लोग इकट्ठा हुए। ग्रामीणों ने हाथों से मिट्टी को हटाया। सभी को सीएचसी बिंदकी में भर्ती कराया।
यहां डाक्टर ने सारिका और सुहानी को मृत घोषित कर दिया। घायल आयुष और नौ माह की बच्ची को कानपुर रेफर किया। एसडीएम आशीष सिंह सीएचसी घायलों को देखने पहुंचे। घायलों को रेफर किए जाने के बाद हादसा स्थल पहुंचे।
एसपी प्रशांत वर्मा, सीओ योगेंद्र मलिक, कोतवाल सत्येंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि हादसे की उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई है। परिवार को दैवीय आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। तहसीलदार को रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
12 साल पहले 20 हजार रुपये में बनाया था कच्चा कमरा
राहुल सोनकर परिवार का मजदूरी से भरण पोषण करता है। उसकी मां गंगाजलि का आवास बनाने के लिए 30 हजार रुपये 12 साल पहले मिले थे। राहुल ने बताया कि रकम का बंदरबांट हुआ था। उसकी मां के हाथ में केवल 20 हजार रुपए ही हाथ लगे थे। उसमें भी कुछ रुपये मिलाकर पक्की दीवार में कच्ची छत डाल सके थे। उसकी मां बाहर कच्ची कोठरी में रहती है। हादसे से राहुल का हाल बेहाल दिखा। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था एक ओर पत्नी और बेटी के शव पड़े हुए थे दूसरी ओर घायल बच्चे अंतिम सांसे गिन रहे थे।
तीन दिन बाद फिर कच्चे आशियाने ने लील लीं दो जानें
कच्चा बरामदा ढहने में तीन बच्चों की मौत के तीन दिन बाद एक और कच्चा आशियाना ढह गया। लगातार घरों के ढहने की घटनाओं से कहीं न कहीं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले परिवार की हालात बयां होती है।
बारिश के मौसम में न जाने कितने ग्रामीण परिवार ऐसे हैं जो आवासीय योजना से दूर हैं। जान जोखिम में डालकर कच्चे घरों में रहते हैं। बिंदकी कोतवाली क्षेत्र के रतवाखेड़ा गांव में सुनील पाल के कच्चे बरामदे में 29 अगस्त की शाम बच्चे मोबाइल में फिल्म देख रहे थे।
इसी दौरान बरामदा ढह गया था। हादसे में नौ बच्चे दबकर घायल हुए थे। सुनील पाल का सभाजीत (5), शिशुपाल (3) और गुड़िया (14) की मौत हो गई थी। छह बच्चे घायल हुए थे। इसी थाना क्षेत्र में दूसरा कोठरी ढहने का शाम को हादसा हुआ। जिसमें मां और बेटी की जान चली गई।