नई दिल्ली: लोक जनशक्ति पार्टी के नेता होने के साथ-साथ पूर्व फिल्म अभिनेता भी रहे चिराग पासवान का कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से लगातार चर्चा में बने हुए ‘नेपोटिज़्म’ (भाई-भतीजावाद) पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई हक नहीं है, क्योंकि उनका खुद का वजूद भी ‘नेपोटिज़्म’ की वजह से ही है. उनका मानना है कि ‘नेपोटिज़्म’ के स्थान पर ‘ग्रुपिज़्म’ (गुटबाज़ी) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

चिराग पासवान ने कहा, “ईमानदारी से कहूं, तो ‘नेपोटिज़्म’ पर कुछ भी कहने अधिकारी नहीं हूं, क्योंकि मैं खुद भी ‘नेपोटिज़्म’ की वजह से ही यहां हूं… लेकिन मेरे विचार में ‘नेपोटिज़्म’ नहीं, इसके लिए ‘ग्रुपिज़्म’ का इस्तेमाल किया जाना चाहिए… मैंने खुद ऐसा कतई अनुभव नहीं किया, लेकिन मुझे दोस्तों-परिचितों से मिली जानकारी के मुताबिक, ‘ग्रुपिज़्म’ होता है, और उसे खत्म किया जाना चाहिए, जो स्वतंत्र जांच से ही मुमकिन है…”

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत के पिता के.के. सिंह ने उनकी अभिनेत्री मित्र रिया चक्रवर्ती के विरुद्ध बिहार की राजधानी पटना के राजीव नगर थाने में FIR दर्ज करवाई है, जिसमें रिया पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. इस FIR में रिया, उनके कुछ परिवार के सदस्यों के अलावा छह अन्य लोग भी नामजद हैं. चिराग पासवान का मानना है कि बिहार सरकार और बिहार पुलिस को इस संबंध में इससे पहले ही सक्रिय हो जाना चाहिए था.
उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तथा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से भी बात कर सुशांत सिंह राजपूत मामले की जांच CBI को सौंपे जाने की आग्रह किया था. चिराग ने बताया कि उद्धव ठाकरे ने उन्हें आश्वासन दिया है कि मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है, लेकिन फिर भी ज़रूरत महसूस होने पर यह केस CBI को सौंपा जा सकता है.
LJP नेता ने कहा, “जब इतने बड़े केस में बिहार सरकार सक्रिय नहीं, तो बिहार से दूसरे राज्यों में जाकर काम कर रहे हमारे युवाओं के साथ कुछ होने पर यह सरकार कया करेगी… मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि अगर सुशांत सिंह राजपूत के मामले में नेपोटिज़्म या कोई भी एंगल शामिल है, तो इसकी जांच फौरन की जानी चाहिए…”