देश:डॉ. मोहम्मद शाहिद इन दिनों अपने गृह नगर टनकपुर में आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी हैं। उनकी पत्नी भी शिक्षिका हैं। मगर डॉ. शाहिद शुरुआती पढ़ाई के दिनों में असाधारण नहीं थे।

यहां तक कि हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षा में महज द्वितीय श्रेणी ही ला सके। लेकिन उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कामयाबी हासिल की। बुधवार को आने वाले उत्तराखंड के बोर्ड परिणाम के बारे में उनसे बात की गई तो उन्होंने कम नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को अपना उदाहरण दिया और बताया हर बार बेहतरी का मौका होता है।
एसआरएम स्टेट आयुर्वेदिक कॉलेज बरेली से उन्होंने बीएएमएस की डिग्री हासिल की। आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी के अलावा डॉ. शाहिद आयुष विभाग के उत्तराखंड के मास्टर ट्रेनर भी हैं।
उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की
डॉ. शाहिद बताते है कि कई बार अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाना हालात पर निर्भर होता है। जब उन्हें इंटर में भी कम नंबर मिले, तो उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया।
हर हाल में डॉक्टर बन लोगों की सेवा करना। इसके लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की। परिश्रम ने उन्हें कामयाबी का स्वाद दिलाया। आयुर्वेदिक कॉलेज में चयन हुआ। और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा।
डॉ. शाहिद कहते हैं कि कम अंक आना आत्ममंथन का अवसर देता हैं। नसीहत देते हैं कि कम नंबर लाने वाले छात्र-छात्राओं को कतई मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि कमियों को समझ उसे दूर करने पर अपेक्षित नतीजे जरूर मिलेंगे।