देश:भारत-नेपाल सीमा पर टनकपुर से लगे नो मेंस लैंड क्षेत्र में नेपाल की ओर से किए जा रहे अतिक्रमण पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। नेपाल की इस हरकत पर चंपावत के डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने कंचनपुर (नेपाल) जिले के अपने समकक्ष सीडीओ (मुख्य जिलाधिकारी) से फोन पर बात करते हुए कड़ा एतराज जताया। उन्होंने दो टूक कहा कि नेपाल के नागरिकों की ओर से किया जा रहा अतिक्रमण पूरी तरह गलत और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

उन्होंने अगाह किया कि ऐसी कोई बात न हो, जिससे किसी तरह सीमा पर तनाव हो। नेपाली नागरिकों की ओर से पौधारोपण की आड़ में की जा रही तारबाड़ रोकना नेपाल की जिम्मेदारी है। हालात बिगड़े तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नेपाल की होगी।
22 जुलाई से सीमा पर उपजे तनाव के बाद से डीएम रोजाना कंचनपुर के सीडीओ से बात कर रहे हैं, लेकिन शनिवार को डीएम पांडेय ने बेहद सख्त लहजे और तीखे तेवर में भारत का पक्ष रखा। नो मेंस लैंड के गायब हुए स्तंभ संख्या 811 की स्थिति चिह्नित नहीं हो पाई है, चिह्नित नहीं होने तक इस सीमा का सम्मान किया जाए।
डीएम ने सीमांकन की स्पष्टता के लिए सीमा पर गायब हुए स्तंभ संख्या 811 की सीमा को चिह्नित कराने के लिए जल्द से जल्द संयुक्त सर्वे का भी सुझाव दिया। डीएम ने पूरे मामले को लेकर प्रदेश के गृह विभाग को भी पत्र भेजा है। साथ ही उन्होंने टनकपुर से लगी नेपाल सीमा पर नो मेंस लैंड पर हो रही हलचल की जानकारी काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास को भी दी है।

आज मौका मुआयना करेंगे कंचनपुर के सीडीओ व एसपी
भारत के सख्त रवैये के बाद नेपाल के कंचनपुर जिले के पुलिस और प्रशासनिक मुखिया आज सीमा का मौका मुआयना करेंगे। चंपावत के एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि फोन पर नेपाल के अधिकारियों से नो मेंस लैंड पर पौधारोपण रोकने और सीमा पर छेड़छाड़ नहीं करने को कहा गया है।
नेपाल ने सीमा का सम्मान करने का आश्वासन दिया है। इसी क्रम में कंचनपुर के सीडीओ नुरहरि खतिवड़ा और एसपी मुकुंद मरासिनी आज स्तंभ संख्या 811 का मौका मुआयना करेंगे। एसपी लोकेश्वर सिंह ने बताया कि दोनों अधिकारियों के दौरे के बाद के हालात व नो मेंस लैंड पर पौधरोपण रोके जाने की स्थिति पर चंपावत के प्रशासन व पुलिस के मुखिया जल्द ही नेपाल के अधिकारियों से वार्ता करेंगे।
विवादित नो मेंस लैंड पर दावा छोड़ने को तैयार नहीं है नेपाल
विवादित भूमि पर नेपाल अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। भारत की ओर से आपत्ति के बाद भी तारबाड़ लगाकर अतिक्रमण का कार्य बेरोकटोक युद्व स्तर पर चल रहा है। शनिवार को एसएसबी के डीआईजी एकेसी सिंह ने सीमा का निरीक्षण किया और नेपाल सशस्त्र पुलिस के अधिकारियों से वार्ता भी की है। वार्ता में क्या बातें हुए इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि नेपाल के अधिकारियों को एक बार फिर विवादित भूमि से तारबाड़ हटाने को कहा गया है।
बता दें कि नेपाल के सीमांत ब्रह्मदेव कस्बे के समीप सीमा स्तंभ संख्या 811 गायब होने से उस क्षेत्र में सीमा का विवाद लंबे समय से बना हुआ है। ब्रह्मदेव बाजार के उत्तरी छोर में स्थित विवादित भूमि पर वहां की सिद्धनाथ सामुदायिक वन समिति की ओर से जन सहयोग से तारबाड़ लगाकर अतिक्रमण किया जा रहा है। जिस पर भारत की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई है। बावजूद इसके तारबाड़ लगाने का काम नहीं रोका गया है।
ये स्थिति तब है जब वार्ता में नेपाल सशस्त्र पुलिस के एसपी की ओर से भारतीय अधिकारियों को उच्च अधिकारियों से वार्ता के बाद तारबाड़ हटवाने का आश्वासन दिया गया है। ताजा सीमा विवाद के बीच शनिवार को एसएसबी के डीआईजी ने नेपाल सीमा का निरीक्षण किया।
नेपाल वन समिति अध्यक्ष बोले विवादित नहीं नेपाल की है भूमि
डीआईजी के दौरे को एसएसबी की ओर से गुप्त रखा गया था। मीडिया को भी डीआईजी के दौरे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। अलबत्ता सूत्रों से पता चला है कि डीआईजी ने निरीक्षण के दौरान विवादित स्थल का जायजा तो नहीं लिया, लेकिन ब्रह्मदेव के समीप नेपाल के पुलिस अधिकारियों से वार्ता की। अनुमान है कि वार्ता में विवादित भूमि पर अतिक्रमण पर चर्चा हुई और नेपाल पुलिस अधिकारियों से तारबाड़ हटाकर विवाद खत्म करने को कहा गया है।
नेपाल के सिद्धनाथ सामुदायिक वन समिति के अध्यक्ष हरक बहादुर चंद का कहना है कि ब्रह्मदेव के पास सीमा की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से विवाद बना हुआ है। जिस भूमि पर भारत की ओर से विवादित बताकर आपत्ति की जा रही है वह नेपाल की है और उस पर सालों से कब्जा भी नेपाल का है। 20 साल पहले भी वन समिति ने इस भूमि पर तारबाड़ किया था, तब कोई आपत्ति नहीं हुई। नेपाल की ओर से विवादित भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया जा रहा है। बीस साल पहले समिति द्वारा गाड़े गए लकड़ी के खंभे सड़कर नष्ट होने से वहां फिर नए पिलर लगाकर तारबाड़ की जा रही है।