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जैविक युद्ध के लिए कितने तैयार हैं, चिंता बढ़ रही…

दुनिया:पाकिस्तान और चीन की एक खुफिया डील के खुलासे ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है। खुफिया डील के मुताबिक चीन की जिस वुहान लैब से कोरोना वायरस के निकलने का शक जताया जा रहा है, अब उसी में भारत के खिलाफ जैविक हथियार तैयार किए जा रहे हैं। 

चीन ने पाक को अपने साथ मिलाया है और दोनों मिलकर यह साजिश रच रहे हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि चीन ने पाक की जमीन का इस्तेमाल करते हुए इबोला जैसा एक खतरनाक वायरस बना भी लिया है, जो बड़े पैमाने पर जान ले सकता है। देश में पहले ही कोरोना से 30 हजार के करीब लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में जैविक युद्ध की यह आहट कितना खतरा पैदा कर सकती है? हम एक न दिखने वाले दुश्मन से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं? जानते हैं सब कुछ..

*जैविक हथियारों के इस्तेमाल की बात करें तो इसका इतिहास एक सदी से भी पुराना है। पहले और द्वितीय विश्व युद्ध में भी जैविक हथियारों का प्रयोग किया गया था।

*पहले विश्व युद्ध में मस्टर्ड गैस का प्रयोग किया गया तो दूसरे विश्व युद्ध में नाजी सेना और जापान ने भी जैविक हथियारों का इस्तेमाल किया।

अमेरिका और सोवियत संघ के बीच शीत युद्ध के दौरान जैविक हथियारों को तैयार करने की एक होड़ सी दिखने लगी थी। 

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी करीब 10 जैविक हथियार तैयार करने में लगा हुआ था। इनमें सेरिन, एंथ्रेक्स जैसे खतरनाक वायरस भी थे।

कनाडा, जापान, सोवियत संघ और अमेरिका भी इस होड़ में बिल्कुल पीछे नहीं रहे। 

क्यों बढ़ा रहा यह हमारी चिंता

*कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले में हम दुनिया में तीसरे नंबर पर आ चुके हैं। देश में संक्रमितों की संख्या 11 लाख पार हो चुकी है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान के बीच हुई गुप्त डील हमारी चिंता बढ़ा सकती है। 

*चीन और पाकिस्तान भारत के खिलाफ नापाक इरादे रखते हैं, यह जगजाहिर है। फिर दोनों ही देशों की सीमाएं हमसे जुड़ी हुई हैं। फिर चीन लद्दाख में एलएसी पर पीछे हटने के बाद बौखलाया भी हुआ है। 

*चीन वायरस तैयार करने के लिए पाकिस्तानी धरती का प्रयोग कर रहा है। ऐसे में चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान में ऐसी लैब नहीं है, जहां से किसी वायरस के बाहर निकलने का खतरा न हो। यह हमारे लिए बड़ा खतरा हो सकता है।

*वायरस को पाउडर या स्प्रे में मिलाकर आसानी से फैलाया जा सकता है।

*इन्हें किसी भी चिट्ठी या लिफाफे में डालकर या किसी अखबार पर छिड़ककर किसी के पास पहुंचाया जा सकता है।

*पूरे के पूरे शहर के पानी और खाने में इसे मिलाना भी बहुत मुश्किल नहीं है।

*इसे किसी भी इमारत पर खड़े होकर या किसी वाहन से हवा में फैलाया जा सकता है। बहुत छोटे से समय और प्रयास से बड़ा नुकसान किया जा सकता है।

*अगर भारत पर ऐसा हमला होता है, तो उससे निपटने के लिए फसलों पर छिड़काव करने वाले उपकरण से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल तक तैयार हैं।

*देश की कई लैब में इस तरह के हमले से निपटने को तैयार रहने के लिए काम चल रहा है। 

*भारत में वायरस को लेकर शोध करने के लिए लेवल-3 और लेवल-4 की कई लैब हैं। पुणे स्थित लैब भी इन्हीं में से एक है।

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