औषध सेवन काल के सही निर्णय से औषध की बायो-एवेलब्लिटी अधिकतम होती
औषध सेवन काल के सही निर्णय से औषध की बायो-एवेलब्लिटी अधिकतम होती है| रोग विशेष में औषध सेवन काल के सदुपयोग से चिकित्सा सफल होती है-
1. खाली पेट- औषधि का शीघ्र पाचन, शोधन कर्म हेतु, सुकुमारों में निषिद्ध
2. भोजन के तत्काल पूर्व- औषध का पूर्ण पाचन, अपान वायु विकार, नाभि से नीचे के अंगों के रोग में, मेद नाश हेतु|
3. भोजन के तत्काल बाद- नाभि से उपर के रोग, मेद वृद्धि हेतु|
4. भोजन के बीच में- समान वायु, कोष्ठ रोग, पित्त रोग|
5. दो भोजनों के बीच में- हृदय रोग, अग्नि दोष, व्यान वायु, मंदाग्नि को निषिद्ध
6. भोजन में मिलाकर- सुकुमार, सर्वांग रोग, अरुचि|
7. हर 3 घंटे में- श्वास, तीव्र कास, हिक्का, वमन, तृष्णा, विष विकार|
8. प्रत्येक ग्रास के साथ- वाजीकर औषध|
9. रात्रि सोते समय- .उर्ध्व-जत्रुगत विकार|
वास्तव में औषध ग्रहण का सही काल चिकित्सक द्वारा दोष, ऋतु, काल की सम्यक गणना के अनुसार निर्धारित होता है|