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बिहार में एडीजी के एक पत्र को लेकर राजनीतिक विवाद,..

नई दिल्ली: बिहार में एडीजी विधि व्यवस्था अमित कुमार के एक पत्र के कारण राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. यह पत्र उन्होंने पिछले हफ़्ते जारी किया था और बृहस्पतिवार को वह वापस ले लिया गया. इस पत्र में उन्होंने सभी जिलों के एसपी को इस बात के सतर्क रहने के लिए कहा है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों के वापस आने से विधि व्यवस्था ख़राब हो सकता है. राज्य सरकार इतने लोगों को रोजगार नहीं दे सकती है.

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर एक संवाददाता सम्मेलन किया और राज्य सरकार से पूछा कि आखिर क्यों ऐसा पत्र जारी हुआ और वापस लिया गया.

बिहार के कटिहार में प्रवासी श्रमिकों पर हुआ लाठीचार्ज भी अब एक राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि एक तरफ़ नीतीश कुमार “प्रवासी” शब्द की नैतिकता पर उपदेश देते हैं और दूसरी तरफ़ अपना असली रंग दिखाते हुए श्रमवीरों को लाठी से पिटवाते है, पैदल चलने पर मजबूर करते है.

तेजस्वी ने एक बयान में कहा कि मुसीबत की घड़ी में उन्होंने राज्यवासियों को छोड़ दिया. उन्हें बिहार नहीं घुसने और आने पर वापस भेजने की धमकी दी. मुख्यमंत्री ने ट्रेन और बस नहीं होने का बहाना देकर उन्हें आर्थिक, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी. क्वारंटाइन सेंटरो में मज़दूरों के साथ पशुवत व्यवहार किया गया. उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया गया. क्वारंटाइन सेंटरों में खाने में सांप, बिच्छू और छिपकली के साथ सूखा भात, नमक और मिर्च परोसी गयी.

तेजस्वी के अनुसार बिहार आने पर माटी पुत्र श्रमवीरों का लाठी-डंडों से स्वागत कराया जाता है जबकि दूसरे प्रदेश अपने श्रमवीरों का फूलों से स्वागत कर रहे है. सरकारी ख़ामियां बताने पर अधिकारियों द्वारा श्रमिकों पर अत्याचार किया जाता है. उन्हें इलाज और उपचार से वंचित किया जाता है. उनके अधिकारों के नाम पर करोड़ों की निकासी कर भ्रष्टाचार की गंगा बहाई जा रही है. आज भी कटिहार रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों को पीटा गया है.जिन्होंने 15 वर्षों में एक सुई का कारख़ाना नहीं लगवाया वो चुनाव देख अब कारख़ाने और रोज़गार की लफ़्फ़ाज़ी कर रहे है. मुख्यमंत्री को बिहार के श्रमवीरों से अविलंब माफ़ी मांगनी चाहिए.

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