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‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ पर दें जोर:पीएम मोदी..

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया है कि कोरोना संकट के दौरान कमज़ोर पड़ी अर्थव्यवस्था को दोबारा विकास के रास्ते पर लाना संभव है. उद्योग संघ सीआईआई के एनुअल सेशन में पीएम ने कहा, ‘उद्योग जगत को अर्थव्यवस्था को आत्म निर्भर बनाने के लिए पहल करनी होगी और फोकस “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” पर होना चाहिए. “प्रधानमंत्री के तौर पर मैं आपको भरोसा दे रहा हूं कि मैं आपके साथ खड़ा हूं. भारतीय उद्योग जगत के लिए ये ‘राइज टू द ओकेजन’ की तरह है. मेरा भरोसा कीजिए, ग्रोथ वापिस हासिल की जा सकती है, इतना मुश्किल भी नहीं है. और सबसे बड़ी बात कि अब आपके पास, भारतीय उद्योगों के पास एक साफ रास्ता है. आत्मनिर्भर भारत का रास्ता. आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि हम और ज्यादा मजबूत होकर दुनिया को स्वीकार करेंगे.

कोविड संकट के दौरान कमज़ोर पड़ती अर्थव्यवस्था को दोबारा विकास के रास्ते पर कैसे लाया जाए इस थीम पर उद्योग जगत के दिग्गजों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सरकार की रणनीति उनके सामने रखी. प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की रणनीति भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 5 चीजें बेहद ज़रूरी हैं. पीएम मोदी ने कहा कि Intent, Inclusion, Investment, Infrastructure और Innovation पर जोर देने की जरूरत है. देश में ऐसे उत्पाद बनें जो देश में बने हुए हों और दुनिया के लिए बने हुए हों.

पीएम ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में फर्नाचर, एसी, लैदर और फुटवियर पर काम शुरू हो चुका है. एयर कंडिशनर के डिमांड का 30 प्रतिशत से अधिक भारत में इंपोर्ट होता है. इसको हमें तेज़ी से कम करना है. दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा चमड़ा उत्पादक होने के बावजूद वैश्विक निर्यात में हमारा शेयर बहुत कम है. नरेंद्र मोदी,ने कहा , “कैसे हम देश का आयात कम से कम करें, इसे लेकर क्या नए लक्ष्य तय किए जा सकते हैं? हमें तमाम सेक्टर्स में उत्पादकता बढ़ाने के लिए अपने टार्गेट तय करने ही होंगे. यही संदेश मैं आज इंडस्ट्री को देना चाहता हूँ”.

बता दें कि फिलहाल जैसे जैसे कोरोना का संकट बढ़ता जा रहा है, अर्थव्यवस्था की चुनौती भी बड़ी हो रही है. इस साल आर्थिक विकास दर और नीचे गिरने की आशंका है, लॉकडाऊन के असर से चरमरा चुकी अर्थव्यवस्था को उबारना सरकार और उद्योग जगत के लिए बड़ी मुश्किल चुनौती साबित होगा. राहत पैकेज के बावजूद कई जगह छोटे और लघु उद्योग अब भी बंद हैं, कहीं वर्किंग कैपिटल की समस्या है, तो कहीं मज़दूरों की कमी है.

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