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आदित्यनाथ और कांग्रेस के बीच ‘जंग’…

नई दिल्ली: प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच ट्वि्टर पर एक तरह से ‘युद्ध’ शुरू हो गया है. कोरोना वायरस सेजंग के बीच यह राजनीतिक युद्ध एक अब एक दूसरे को चैलेंज करने के स्तर तक पहुंच रहा है. एक ओर जहां प्रियंका गांधी पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर बीजेपी की सरकारों को दोष देने से नहीं चूक रही हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी उनको जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ नही रहे हैं. प्रियंका गांधी की ओर से जहां प्रवासी मजदूरों के लिए 1 हजार बसें चलाने का प्रस्ताव दिया गया तो सीएम योगी ने इसे स्वीकार करते हुए बसों और ड्राइवरों के डिटेल पूछ डाली है. इससे पहले सीएम योगी ने कांग्रेस से चार सवाल भी ट्ववीटर पूछे थे. इस कांग्रेस भी सवाल देने से नहीं चूक रही है.

सीएम योगी ने कांग्रेस से क्या पूछे हैं सवाल

जब आपके पास 1000 बसें थीं, तो राजस्थान और महाराष्ट्र से ट्रकों में भरकर हमारे साथियों को उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व बंगाल क्यों भेज रहे हैं?
औरैया में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना से पूरा देश आहत है. एक ट्रक पंजाब से और दूसरा राजस्थान से आ रहा था. क्या कांग्रेस और प्रियंका गांधी जी इस दुर्घटना की जिम्मेदारी लेंगी ? हमारे साथियों से माफी मांगेंगी?

देशभर में जितनी भी श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही है उनमें से आधी से ज्यादा ट्रेनें उत्तर प्रदेश ही आईं है. अगर प्रियंका वाड्रा जी को हमारी इतनी ही चिंता है तो वो हमारे बाकी साथियों को भी ट्रेनों से ही सुरक्षित भेजने का इंतजाम कांग्रेस शासित राज्यों से क्यों नहीं करा रहीं?

प्रियंका गांधी जी कहती हैं कि उनके पास 1000 बसें हैं. यह और बात है कि अब तक इन बसों की सूची तक उपलब्ध नहीं कराई गई, न ही हमारे साथियों की. बसों और हमारे साथियों की सूची उपलब्ध करा दी जाए, जिससे उनके कार्य ट्विटर नहीं धरातल पर दिखें
कांग्रेस ने भी दिए जवाब

पत्र 18 मई को लिखा. लेकिन ट्वीट में पहले लिख दिया कि बसों की सूची नहीं दी. ये कोई तो है मुख्यमंत्री कार्यालय में जो मुख्यमंत्री जी की फजीहत करा रहा है. या तो वो ये दिखाना चाहता है कि सीएम कार्यालय केवल ट्विटर पर एक्टिव है. जमीन से उसका कोई जुड़ाव नहीं है.

ट्रेन केंद्र सरकार चलाती है. यूपी मुख्यमंत्री कार्यालय को कोई अपडेट कर दे. मुख्यमंत्री जी के कार्यालय के अकाउंट से ऐसी ट्वीट्स सही नहीं हैं जिसमें ये तक जानकारी न हो कि रेलवे केंद्र सरकार के अधीन है. यूपी के मुख्यमंत्री हैं वो. इतनी बदनामी ठीक नहीं है.

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