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लॉकडाउन ने किसानों की कमर तोड़ी,.

भोपाल: कोरोना वायरस की महामारी के कारण ‘लॉकडाउन’ ने मध्‍यप्रदेश के किसानों की कमर तोड़ दी. लॉकडाउन के कारण फलल और सब्जी चौपट हो गई है, दालों को भी नुकसान पहुंचा है. इससे किसानों को 1000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है. कई जिलों से ऐसी तस्वीरें आई हैं जहां किसान अपनी फसल जानवरों को खिला रहे हैं या फिर खुद उखाड़ कर फेंक रहे हैं. मंडियों में गेहूं खरीदी का काम भी शुरू हो गया है लेकिन इक्का-दुक्का किसान ही गेहूं बेचने पहुंच रहे हैं. सीहोर मंडी में किसान मोबाइल पर SMS मिलने पर पहुंचे हैं, बात लॉकडाउन में तकलीफ की भी निकली है. कचनारिया से आए अशोक गौर ट्रैक्टर में बस 7 क्विंटल गेहूं लेकर पहुंचे हैं घर में लगभग 250 क्विंटल और पड़ा है. वे कहते हैं-बहुत दिक्कत आ रही है. पूरा अनाज घर में रखा है, एक किलो दाना बाहर भी नहीं बिक रहा है. एक और किसान लखन भी 6 क्विंटल गेहूं ही ला पाए हैं कहते हैं इससे ट्रैक्टर के डीजल का खर्च भी शायद ही निकले.

हर दिन छह किसान पहुंच रहे मंडी
वैसे मंडियों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा है, मध्यप्रदेश में 335.46 लाख मीट्रिक टन गेंहू के उत्पादन का अनुमान है जो देश के उत्पादन का लगभग 31.58 प्रतिशत है. ऐसे में 21 लाख किसानों को फिलहाल गेहूं बेचना है. पिछले साल सीहोर में ये प्रक्रिया डेढ़ महीने में पूरी हुई, इस साल हर सोसायटी से हर दिन 6 किसान पहुंच रहे हैं ऐसे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल है ये काम कब तक पूरा होगा. वैसे सोल उपार्जन केन्द्र के प्रबंधक मुकेश पटेल कहते हैं-अभी शुरूआत है. हम 6-6 एसएमएस दे रहे हैंलेकिन बाद में प्रक्रिया तेज होगी फिर भी दो महीना तो लग ही जाएगा.

बकरियों को खिलाने पड़ रहे टमाटर
गेहूं खरीदी का काम तो शुरू हो गया लेकिन असल दिक्कत सब्जी-फल-फूल के किसानों को है. बड़वानी जिले में तो हालत यह है कि बकरियां, टमाटर खा रही हैं, प्रशासन ने सब्जी मार्केट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, किसान पहले तो लॉकडाउन के चलते आसपास के क्षेत्रों में सब्जियां बेचने नहीं जा पा रहे थे, अब सेंधवा में कर्फ्यू है वहां भी सब्जी भेज नहीं पा रहे हैं, गांव में कोई खरीदार है नहीं. पिसनवाल के भोलिया तीन एकड़ खेत में गोभी लगाई थी, कोई खरीदार नहीं मिला तो उन्होंने पूरे खेत में ट्रैक्टर चलवा दिया, “गोभी बिकती नहीं, वायरस के कारण से ले जाए कहां इससे गोभी को खत्म कर दूसरे फसल की तैयारी करें. ”

जगदीश भी कहते हैं “सब्जी बेचने नहीं दे रहे हैं, कहां ले जाए इसलिये खेत खाली कर रहे हैं.”धार जिले के सिंघाना में किसानों ने टमाटर, आलू, मटर जैसी कई सब्जियां लगाई थीं, सब बर्बाद हो गया. वे कहते हैं, ‘न सब्जी बेच पाये, न तोड़ पाए. खराब सब्जी फिंकवाने तक में लागत आ रही है.’ गांव के किसान लोकेश बर्फा कहते हैं हमने गरीबों में सब्जियां बांटी फिर भी लाखों का नुकसान हुआ है.

फूलों की खेती करने वाले परेशान और फूल माला बनाने वाले भी
जबलपुर में इन सुंदर फूलों ने किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है, मंदिर, मस्जिद सहित सभी धार्मिक बंद हैं, शादी ब्याह में भी मांग नहीं है किसान तो परेशान हैं ही, फूलों की माला बनाने वाले हजारों लोगों के सामने भी रोजी का संकट है. जबलपुर में लगभग पांच सौ एकड़ जमीन पर गेंदा फूल की खेती होती है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इन खेतों में लगे फूलों को तोड़नेवाला और खरीदनेवाला नहीं मिल रहा है. जबलपुर से सटे बरगी के चरगवां रोड पर डगडगा हिनोता में फुलवाड़ी के नाम से प्रसिद्ध हैं जहां गेंदा फूल की खेती होती है. हर किसान इन खेतों से लगभग हर हफ्ते एक हजार किलो गेंदा का फूल निकालता है. लेकिन पिछले पंद्रह दिन से तैयार फूल नहीं तोड़े जा रहे हैं. धीरे-धीरे फूल झड़कर नीचे गिर जा रहे हैं. अगले 10 दिन तक पूरा फूल बगान ही बर्बाद हो जाएगा. हिनोता के किसान राजेश पटेल परेशान हैं कहते हैं,” ये सब सूख रहे हैं, हमारे फूल … हमारा गुजर बसर कैसे चलेगा.”

सब्‍जी तोड़ने को मजदूर नहीं मिल रहे, बाजार भी मंदा
नरसिंहपुर जिले में भी सब्जी उत्पादक किसानों पर आफत आ गई है कई एकड़ में सब्जी का उत्पादन करने वाले किसान अब इस बात से परेशान हैं कि न तो सब्जी तोड़ने वाले मजदूर ही मिल रहे हैं और न ही इन सब्जियों को बाजार मिल पा रहा है और यदि ज्यादा मजदूरी के लालच में मजदूर जुटा भी लिए जाएं तो लॉकडाउन के चलते सब्जी को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध नहीं है.

फूल फेंकने को मजबूर किसान
आमतौर पर दिसंबर से लेकर जून तक बाजारों में फूल की बहुत मांग रहती है, जिसके लिए लोग अलग-अलग तरीके से पारंपरिक खेती छोड़कर फूलों की खेती अपना रहे थे. छिंदवाड़ा के भी कई किसान जरबेरा के फूलों की खेती करते हैं जो विदेशों तक पहुंचता है लेकिन लॉकडाउन के चलते चाहे फुलजिस हो या जरबेरा किसान उसे फेंक रहे हैं. राजकुमार अहिरवार कहते हैं लॉकडाउन होने से सब बिक्री बंद है, कहीं जा ही नहीं रहा डेली के बिकते थे 5000-6000 रुपये के, अब सब फेंक रहे हैं. उज्जैन में तो खुद महाकाल मंदिर में रोज फूलों की खपत होती थी, लेकिन श्रद्धालु आ नहीं रहे, फूल बिक नहीं रहे. फूलों की खेती करने वाले जगदीश गेहलोत कहते हैं “नुकसान बहुत हो रहा है, फूल मंडी बंद पड़ी है बिक नहीं रहा है, एक क्विंटल मेरा माल रोज़ खराब हो रहा है.”

मंदसौर में प्‍याज की फसल चौपट
मंदसौर में प्याज की फसल चौपट हो गई है, पिछली बार बाढ़ ने बर्बाद किया इस बार लॉकडाउन में सब लॉक है. राजू पाटीदार अपने घर के आंगन में फैलाई इस फसल को अपने बच्चों की मदद से पलट कर बचाने का प्रयास कर रहे है. प्याज की जो फसल है, 10-15 दिन से खराब हो रही है.

मंदसौर में खीरा ककड़ी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान उठाकर हो रही पैदावार को खपाना मुश्किल हो रहा है. खीरा ककड़ी के एक बीघा उत्पादन के लिए 12 लाख की लागत में मध्यप्रदेश राज्य शासन द्वारा नेट हाउस योजना में 50% की सब्सिडी दी गई थी, लेकिन अब ये किसान के किसी काम की नहीं. ज्ञानचंद धनगर कहते हैं 3 महीने की फसल है, दो ढाई क्विंटल डेली निकलती है, ले जाने में दिक्कत आ रही है.सीहोर में बिजौरी के किसानों ने खेतों पर लगी बेंगन और टमाटर उखाड़ कर सड़क पर फेंक दी. लॉकडाउन में कई नियमों के चलते लगभग 70 प्रतिशत सब्जी विक्रेताओं ने मंडी आना ही बंद कर दिया है, ठेले वालों से नीलामी में 25 से 50 प्रतिशत सब्जी की ही नीलामी हो पा रही है, गांव के किसान राहुल राठौर ने कहा “आधे एकड़ में भटे लगे हैं जो हम काट काट कर फेंक रहे हैं नुकसान के कारण.”कटनी में प्रशासन ने सब्जी मंडी में भीड़ कम करने के लिए दूसरी जगह दी जहां ग्राहक नहीं आ रहे… वहीं पॉली हाउस में लगी सब्जियां भी खराब हो रही हैं.

फूलों के किसान तो हुए बुरी तरह बरबाद
प्रदेश में फूलों की पूरी फसल चौपट हो गई है. इसका करीब एक हजार करोड़ का सालाना कारोबार होता है. इस समय मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे समेत सभी धार्मिक स्थल बंद हैं. शादी-विवाह समेत अन्य समारोह भी बंद हैं. इससे करीब 200 करोड़ का नुकसान हुआ है. मंडियां और परिवहन बंद होने से फल और सब्जियां सड़ रही हैं. टमाटर, मिर्च, गिलकी, भिंडी, लौकी, ककड़ी, तरबूज, खरबूज और संतरे की फसल खराब हो गई है. इससे करीब 500 करोड़ का नुकसान की आशंका है. कांग्रेस के किसान नेता और कृषि सलाहकार परिषद के सदस्य केदार सिरोही कहते हैं “फूल का किसान सौ प्रतिशत किसान बर्बाद हो चुका है, अचानक लॉक डाउन हुआ है फूल के साथ कोई विकल्प नहीं बचा, सब्जी में दो नुकसान हुआ है. परिवहन बंद हो गया, हम्माल रुक गये, गांव से शहर पहुंचाने का कोई विकल्प नहीं मिला, यहां तक की लोग तरबूज 3-4 रुपये किलो में बेचना चाह रहे हैं लेकिन कोई विकल्प नहीं मिल रहा है. जानकार कहते हैं कि किसानों के प्रति एकड़ मुआवजा मिलने, गेंहू-चने पर बोनस और बिना लाइसेंस मंडी के बाहर खरीदी कर करने वाले व्यापारियों पर, और फूल-सब्जी उत्पादक किसानों के कर्ज माफ कर उन्हें थोड़ी राहत दी जा सकती है.

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