जबलपुर: पूर्व मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह (64) को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने डिजिटल साक्ष्यों, CCTV फुटेज, WhatsApp संदेशों और लंबित फोरेंसिक (CFSL) रिपोर्ट को आधार बनाते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने उल्लेख किया कि घटना की रात और उससे पहले के डिजिटल ट्रांसक्रिप्ट व WhatsApp बातचीत से ट्विशा शर्मा के गंभीर मानसिक तनाव और घुटन की स्थिति स्पष्ट होती है।
हाईकोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) से मृतका के मोबाइल फोन और घर के DVR से जुड़े डिजिटल डेटा की जांच रिपोर्ट आना बाकी है, जो मामले के लिए बेहद अहम है।
सीबीआई (CBI) की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में तर्क रखा कि शुरुआती दौर से ही सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश की गई है, जिसे अदालत ने खारिज नहीं किया।
पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा ने 9 दिसंबर 2025 को वकील समर्थ सिंह (पूर्व जज गिरिबाला सिंह के बेटे) से शादी की थी।
शादी के महज पांच महीने बाद, 12 मई 2026 की रात ट्विशा भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी पाई गई थीं। एम्स (AIIMS) भोपाल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
एम्स नई दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण फंदे पर लटकने से दम घुटना (एंटी-मॉर्टम हैंगिंग) बताया गया।
गिरिबाला सिंह पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और दहेज निषेध अधिनियम के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ना का केस दर्ज है।
अभियोजन के मुताबिक, ट्विशा के पेशेवर बैकग्राउंड को लेकर उन्हें परेशान किया जाता था और उन पर निगरानी रखी जाती थी। अप्रैल 2026 में मेडिकल गर्भपात के बाद तनाव और बढ़ गया था।
पति समर्थ सिंह पर नशीले पदार्थों की लत, मारपीट और ट्विशा के इक्विटी निवेश को ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं।