मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी संवाद: ‘विकसित उत्तराखंड’ के लिए जेन-जी युवाओं ने दिए नवाचार और विकास के नए आइडिया
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी संवाद’ कार्यक्रम में ‘विकसित उत्तराखंड’ के विजन को लेकर धामी सरकार युवाओं की ‘जेन-जी’ (Gen-Z) सोच की मुरीद नजर आई। इस संवाद के दौरान प्रदेश के युवाओं ने राज्य की प्रमुख चुनौतियों—पर्यावरण, रोजगार, मानव-वन्यजीव संघर्ष, पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव और विचार सौंपे।
मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रोक: लैंसडौन के आदित्य भारद्वाज ने प्रदेश में गुलदार और भालुओं के बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गुलदार के खौफ के कारण स्कूलों में छुट्टियां तक करनी पड़ रही हैं और ग्रामीण खेतों में काम करने से डर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस समस्या के समाधान हेतु प्रभावी योजना बनाने का आग्रह किया।
चंपावत की यामिनी ने वर्तमान सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को आधुनिक बनाने के लिए ‘स्मार्ट क्लासेज’ को बढ़ावा देने हेतु योजना बनाने का सुझाव दिया।
पौड़ी की श्रुति रावत ने ‘पर्वतमाला योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत धार्मिक व पर्यटन स्थलों को रोपवे से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस योजना से स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की स्पष्ट रणनीति बनाई जानी चाहिए।
देहरादून के सादुल कपूर ने तेजी से बढ़ती एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) टेक्नोलॉजी पर अपनी बात रखते हुए इसके उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
सरकारी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना पर सवाल उठाया गया।
हरिद्वार की लवप्रीत कौर ने ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते चलन और उससे जुड़ी आर्थिक समस्याओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे अपने बच्चों के लिए स्मार्टफोन या लैपटॉप खरीद सकें। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रश्न किया कि सरकार ऐसे जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता के लिए क्या व्यवस्था करेगी।
उत्तरकाशी के अनमोल परमार ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी ग्राम स्तर तक हर व्यक्ति को उपलब्ध कराने की सुदृढ़ व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने विद्यालयों में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए नियमित करियर काउंसलिंग उपलब्ध कराने की बात रखी।
रुद्रपुर की वैष्णवी ने वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों को सहेजने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के ज्ञान और अनुभवों को संरक्षित करने तथा समाज हित में उनका उपयोग करने के लिए एक ‘नॉलेज बैंक’ विकसित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं के सभी प्रश्नों के उत्तर दिए और उनके सुझावों पर आवश्यक कदम उठाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने सोचा नहीं था कि विकसित उत्तराखंड विजन के लिए युवाओं की ओर से इतने महत्वपूर्ण और दूरदर्शी सुझाव आएंगे।” उन्होंने विश्वास दिलाया कि युवाओं के साथ सरकार का यह संवाद निरंतर जारी रहेगा।