कनखल स्थित जगद्गुरु आश्रम में आयोजित भव्य पट्टाभिषेक समारोह में स्वामी कपिलानंद सरस्वती को निरंजनी अखाड़े का नया महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। इस अवसर पर सभी 13 अखाड़ों के संतों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ तिलक व चादर अर्पित कर उनका अभिषेक किया।
समारोह की अध्यक्षता जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने की। उन्होंने कहा कि स्वामी कपिलानंद सरस्वती अखाड़े की उन्नति और धर्म-संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संत परंपरा में त्याग, साधना और विकारों से दूर रहने की महत्ता पर बल दिया।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि साधना संतों की वास्तविक शक्ति है और इसके पूर्ण होने पर ही संत की आभा प्रकट होती है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने इस पद को महत्वपूर्ण बताते हुए विश्वास जताया कि स्वामी कपिलानंद सरस्वती अखाड़े का गौरव बढ़ाएंगे।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने ज्ञान, ध्यान और तप को संत जीवन की आधारशिला बताया। निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी ने समारोह के संयोजन में अहम भूमिका निभाई।
इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ललितानंद गिरी, स्वामी आदि योगी पुरी, स्वामी सहजानंद पुरी, स्वामी रामानुज सरस्वती, स्वामी अनंतानंद, महंत दर्शन भारती, महंत राज गिरी, महंत साधनानंद, महंत सूर्यांश मुनि, महंत खेम सिंह, स्वामी भक्ति गिरी, स्वामी संतोषानंद, संघ नेता पदम सिंह, एसएमजेएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील बत्रा और अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक आदि उपस्थित रहे।