उत्तराखंड के पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण सम्मान सम्मान से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की। बता दें कि भगत सिंह कोश्यारी महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रह चुके हैं।
ऐसा रहा भगतदा का राजनीतिक सफर
कोश्यारी ने अपनी कर्मभूमि पिथौरागढ़ को बनाया। गरीब परिवार से निकलकर विधान परिषद सदस्य, विधायक, मुख्यमंत्री, राज्यसभा सदस्य, लोकसभा सांसद और फिर राज्यपाल की कुर्सी तक पहुंचे।
इसकी झलक बचपन से ही भगतदा में भी दिखाई देने लगीं थीं। परिवार की आजीविका का साधन खेती था। इस कारण इनका प्रारंभिक जीवन काफी गरीबी में बीता। कोश्यारी ने प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय महरगाड़ से प्राप्त की। जूनियर हाईस्कूल की शिक्षा घर से आठ किमी दूर शामा से हासिल करने वाले भगत दा ने हाईस्कूल की शिक्षा कपकोट से और इंटर की शिक्षा पिथौरागढ़ से हासिल की। भारी आर्थिक संकट के बीच भगत दा ने बीए और एमए की पढ़ाई अल्मोड़ा महाविद्यालय से की। एमए अंग्रेजी कोश्यारी वर्ष 1966 में आरएसएस के संपर्क में आए कोश्यारी ने संघ की मजबूती के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। आरएसएस के प्रचारक रहे कोश्यारी ने वर्ष 1977 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की। सरस्वती शिशु मंदिर में लंबे समय तक अध्यापन किया।
छात्र राजनीति से राजनीति की शुरुआत करने वाले कोश्यारी ने वर्ष 1989 में अल्मोड़ा संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस चुनाव में पराजय के बाद भी कोश्यारी ने जनता से जुड़ाव नहीं छोड़ा।
यूपी में विधान परिषद सदस्य, उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में ऊर्जा, सिंचाई, संसदीय कार्य मंत्री का दायित्व संभालने वाले कोश्यारी को अंतरिम सरकार में मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य मिला। देश के दोनों सर्वोच्च सदनों राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य रहे कोश्यारी को इसके बाद पार्टी ने महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाकर उनकी मेहनत, लगन, समर्पण और संघर्ष का प्रतिफल दिया था।