बिजनौर में कोर्ट में घुसकर शाहनवाज की हत्या करने के मामले में 53 महीने पांच दिन बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। इसमें अभियुक्त सुमित को आजीवन कारावास की सजा मिली। निर्णय आने तक इस केस में 52 तारीख लगी और 11 गवाही हुई। हालांकि, इस केस में दो आरोपियों साहिल और अकराज की सुनवाई पर हाईकोर्ट का स्टे है।
पूरे प्रदेश को थर्रा देने वाली इस घटना में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता मुकेश चौहान ने 11 गवाह पेश किए। इनमें रिपोर्ट कर्ता विकास कुमार, कोर्ट मोहर्रिर मनीष कुमार, कोर्ट मोहर्रिर मोहित कुमार, उपनिरीक्षक ओमकार सिंह, हेड मोहर्रिर मलखान सिंह, कांस्टेबल रवि कुमार, निरीक्षक रमेश शर्मा, नायब तहसीलदार अजय कुमार, डॉक्टर अजीत सिंह, डॉक्टर पुनीत कालरा, उपनिरीक्षक मन फूल सिंह की गवाही कराई गई। मामले में करीब 52 तारीख लगी और 53 महीने पांच दिन बाद कोर्ट का निर्णय आया।
मजबूत कर दी गई थी कोर्ट की सुरक्षा
17 दिसंबर 2019 को बिजनौर कोर्ट में शाहनवाज को दिल्ली से पेशी पर लाया गया था। नजीबाबाद के गांव कनकपुर निवासी शाहनवाज पर नजीबाबाद के प्रॉपर्टी डीलर हाजी अहसान और उसके भांजे शादाब की हत्या को अंजाम दिलाने का आरोप था। हालांकि, अभी तक हाजी अहसान के केस में सुनवाई जारी है। उधर, शाहनवाज की हत्या के बाद पूरे उत्तर प्रदेश की कोर्ट में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। इसके बाद ही प्रदेशभर की कोर्ट में बाउंड्री कराई गई थी। बिजनौर में सुरक्षा इंतजाम पुख्ता किए गए जोकि अभी तक जारी हैं।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
शाहनवाज हत्याकांड केस में कोर्ट के निर्णय सुनाए जाने को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोर्ट रूम को खाली करा लिया गया। एसपी नीरज कुमार जादौन के निर्देश पर सीओ संग्राम सिंह, शहर कोतवाल सुशील कुमार, महिला थाना प्रभारी, दरोगा मीर हसन, दरोगा यशदेव शर्मा आदि भारी पुलिस फोर्स के साथ मौजूद रहे। पुलिसकर्मियों ने बाकायदा बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी थी।