CM के तौर पर पुष्कर सिंह धामी फिर BJP सरकार की कमान संभालेंगे,इसका ऐलान दो साल पहले आज ही के दिन BJP आला कमान ने किया था.2 दिन बाद ही शपथ ग्रहण भी हो गया था.सियासी पंडितों-अधिकांश लोगों को तब बेहद हैरानी हुई थी.चुनावी नतीजों के बाद पहली बार खिले-मुस्कुराते चेहरों के साथ PSD ने शपथ ग्रहण के लिए खुद की नई ऊर्जा-आत्मविश्वास बढ़ाने वाली पोशाक तय करने से पहले नए संकल्पों को चुन और ठान लिया था.अपने प्रदर्शन से उन्होंने बिला शक PM नरेंद्र मोदी-HM अमित शाह के साथ ही संघ को भी सुकून पहुँचाया है.घर के ही दगाबाजों के शिकार और पार्टी के लिए अपनी कुर्सी न्यौछावर करने से न चूकने वाले पुष्कर ने दूसरी पारी में एक के बाद एक तमाम तूफानी कानूनों और कदमों को अंजाम देते हुए उनकी उम्मीदों से कई फर्लांग आगे का सफ़र तय कर लिया है.

इतना अहम और ऐतिहासिक दिन लेकिन मुख्यमंत्री ने राजधानी में छोटा सा भी औपचारिक जलसा नहीं किया.इसके बजाए लोकसभा चुनावों के साए में चम्पावत-अपने निजी घर गाँव खटीमा के लोहिया हेड (उधम सिंह नगर) में आम लोगों-गाँव वालों और फ़ुटबाल खेल रहे बच्चों के साथ हँसते-खेलते गुजारा.खटीमा के लोग निश्चित तौर पर आज हाथ मल सकते हैं कि वे 5 साल वाले CM की विधानसभा का अंग बनने से रह गए.ये सम्मान चम्पावत ले गया.जहाँ के लोगों ने उप चुनाव में PSD को अपने घर-आंगन में जगह और इज्जत देने के साथ ही अभूतपूर्व Record विजय के साथ फिर MLA बनाया.23 मार्च को पुष्कर ने फिर से शपथ ली थी.दिल तोड़ने वाले चुनावी नतीजे के बाद उनके तथा समर्थकों के चेहरों पर तकरीबन हफ्ते भर घर किए रही उदासी और गुमसुम माहौल ने तब मुस्कुरात्ते-खिलखिलाते चेहरों को जगह देते हुए विदाई ली थी.
ये चालू हफ्ता निश्चित रूप से पुष्कर को भावुक करने और जिंदगी की सीख को नए सिरे से अपनाने के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है.अपने-परायों में भेद करने के लिए प्रेरित करेगा.ये ही वह हफ्ता है जब वह कार्यवाहक CM थे लेकिन पार्टी के कई सूरमा उनकी गद्दी संभालने के लिए आकाओं के दरबार में कोर्निश करने में जुटे थे.चंद को छोड़ तकरीबन सभी बड़े नौकरशाहों ने नए संभावित सुल्तानों के दर पर माथा टेकना शुरू कर दिया था.उन्होंने भी, जो चुनाव के दौर में कांग्रेस के कुछ दिग्गजों के यहाँ सुबह-शाम या फिर जब मौका मिले तब चोरी-छिपे जी-हुजूरी-चापलूसी के रिकॉर्ड तोड़ने लगातार पहुँचते रहे थे.उनको ये बड़ी उम्मीद थी कि अगली बार सरकार कांग्रेस की होगी.उत्तराखंड का सियासी रिकॉर्ड यही था.पुष्कर न होते तो ये रिकॉर्ड शायद ही टूटता.कई IAS-IPS अफसरों ने वफादारी तो क्या करते लेकिन दगाबाजी जम के की.CM House चुनाव नतीजों के बाद वीरानगी और सूनेपन में घिरा रहता था.उस दौरान ऐसा भी वक्त आया जब वह कार्यवाहक CM के तौर पर कहीं हेलिकॉप्टर से से गए तो आगवानी करने में अफसर प्रोटोकॉल भूल कन्नी तक काट गए थे.
सिर्फ पुराने और संघर्ष भरे दिनों के चंद चेहरे ही तब भी उनके साथ लगातार और डट के दिखे.कुछ नौकरशाहों ने उनका हौसला उन कठिन पलों में भी नैतिक साथ दे के बढ़ाया.वे कौन थे, उनका नाम लेने की जरूरत नहीं.वे आज अहमतरीन कुर्सियों-ओहदों को संभाल रहे हैं.पुष्कर की ये खासियत उनके खास लोग ही जान सकते हैं.जान देने वालों के लिए वह कुछ भी करने से नहीं हिचकते रहे हैं.मैं कुछ ऐसे लोगों को जानता हूँ जो आज बड़ी भूमिका निभा रहे और लोगों की आँखों में खटकते भी हैं.PSD बाखूबी हकीकत से वाकिफ हैं कि किसको ले के लोग क्या राय बनाते हैं.उनके विरोधी कैसी-कैसी चुगली करने की कोशिश करते हैं.इसके बावजूद उन्होंने अपनों का साथ छोड़ना तो दूर उनको खुल के या अनौपचारिक तौर पर करीब रखा है.
पुष्कर में प्रशासनिक खूबियाँ और खासियत शुरू से दिखती रही हैं.जब उत्तराखंड बना ही था और भगत सिंह कोश्यारी को नित्यानन्द स्वामी के मंत्रिपरिषद में बतौर ऊर्जा मंत्री जगह दी गई थी तो पुष्कर उनके PRO के तौर पर बेहद परिपक्व ढंग से काम करते नजर आते थे.यकीन करेंगे कि वह तब महज 22 साल के थे.कोश्यारी CM बने तो वह जबरदस्त OSD के तौर पर उभरे थे.आज BJP युवा मोर्चा के अध्यक्ष या अन्य ओहदेदारों को शायद ही कोई पहचानता हो लेकिन उत्तराखंड के BJYM प्रमुख रहने के दौरान PSD ने उस वक्त की Congress सरकार (ND तिवारी वाली) के खिलाफ एक के बाद एक मसलों-मुद्दों पर हमलावर तेवरों-सियासी हमलों-रैलियों-आयोजनों से आसमान सिर पर उठा रखा था.ये ही वे दिन थे जिससे वह बड़े और भविष्य के युवा सियासी नायक के तौर पर उभरे थे.