उत्तराखंड में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर 23 साल बाद भी असमंजस बना हुआ है। यह हाल तब है, जबकि एक साथ बने राज्य छत्तीसगढ़ में वर्ष 2003 और झारखंड में 2010 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी बन चुकी है, लेकिन उत्तराखंड में इसके लिए भूमि की तलाश ही अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।
हालांकि, रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद गांव में मार्च 2019 में इसका शिलान्यास किया गया था। विभागीय अधिकारी बता रहे हैं, इसका संपर्क मार्ग ठीक नहीं है। राज्य में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को लेकर दावा किया गया था कि शैक्षिक सत्र 2014-15 में इसमें कक्षाएं शुरू की जाएंगी। बताया गया कि इसे पहले नैनीताल में बनना था, लेकिन वहां इसके लिए जमीन नहीं मिली।
इस पर मार्च 2019 में देहरादून जिले के रानीपोखरी के लिस्ट्राबाद में रेशम विभाग की 10 एकड़ भूमि में इसका शिलान्यास किया गया। शिलान्यास के बाद शुरुआती काम के लिए 50 लाख रुपये भी मंजूर किए गए, लेकिन शिलान्यास से आगे काम नहीं हुआ। इस बीच विभाग के अधिकारियों ने इस स्थान पर यह कहते हुए पेच लगा दिया कि जिस स्थान पर इसे बनना है, उस स्थान के लिए संपर्क मार्ग ठीक नहीं है।
छात्र प्रैक्टिस कर सकें इसके लिए कोर्ट होना जरूरी
यह स्थान मानक के अनुसार ठीक नहीं है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पास छात्र प्रैक्टिस कर सकें इसके लिए कोर्ट होना जरूरी है। हालांकि, विभाग के कुछ अधिकारी यह बता रहे हैं कि आसपास के क्षेत्र में भूमि की तलाश की जा रही है। एयरपोर्ट नजदीक होने से प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर से आने वाले अधिकारियों को आवाजाही में आसानी होगी। इस लिहाज से यह उपयुक्त स्थान है।
राज्य गठन के 23 साल बाद भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का न बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। पहले बताया गया कि यह नैनीताल में बनेगा, फिर हरिद्वार और देहरादून में इसके बनने की बात आई, लेकिन इसे लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके न बनने से विधि के छात्रों को नुकसान हो रहा है। यहां यूनिवर्सिटी बनती तो निजी विवि की मनमानी पर रोक लगती, देशभर से शिक्षाविद यहां आते, सेवानिवृत्त न्यायाधीश के रूप में अच्छी फैकल्टी मिलने से विधि छात्रों को इसका लाभ मिलता। -चंद्रशेखर तिवारी, वरिष्ठ सदस्य बार काउंसिल उत्तराखंड